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सरस्वती मेला

एक छोटा लड़का , एक घोड़ा , एक छछूंदर और एक लोमड़ी – उनकी दोस्ती और दुनिया बचाने की कवायद

" तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो ?"

"दयालु " - लड़के ने कहा |

...

‘बहुत मैला है ये सूरज

किसी दरिया के पानी में

उसे धोकर सुखाएं फ़िर..

.. यूँ लग रहा है 

अपनी ये दुनिया 

जो सदियों की विरासत है 

जो हम सब की अमानत है 

पुरानी हो गयी है 

इसमें अब थोड़ी मरम्मत की ज़रूरत है ‘

                                                   – निदा फाज़ली 

बड़े होने के साथ-साथ हमें अपनी बचपन की चमकीली दुनिया काफ़ी टूटी – फूटी और बेरंग दिखाई देती है | ऐसी दुनिया जिसके कोने उधड़ रहे हों , जिसपर धब्बे हों, जिसकी रौशनी कहीं गुम हो गयी हो | इसको  बदलने का विश्वास और हिम्मत भी हमें बचपन से मिलती है – वो जादुई जगह जहाँ सब कुछ संभव होता है , जहाँ रंगों पर भरोसा होता है | पर दुनिया की मरम्मत की सबसे पहली शर्त है कि हम ख़ुद की मरम्मत कर पाएँ | आखिर हम भी अपनी दुनिया से उतने अलग तो नहीं , हम भी उतने  ही थके हुए , दरारों के साथ जीते और कोनों से चटके होते हैं – उसी दुनिया की तरह जिसमें हम रहते हैं | जितने प्यार से और विश्वास से हम दुनिया को बचाना चाहते हैं , उतने ही ( या उससे थोड़े से  ज्यादा ) प्यार और विश्वास से हमें ख़ुद को बचाना होता है |

चार्ली मैकेसी एक बहुत प्यारे चित्रकार और कार्टूनिस्ट  हैं जिन्होंने दशकों लम्बे अपने कार्य में कई बड़े प्रकाशनों और अख़बारों के लिए इलस्ट्रेशन ( कलात्मक चित्रण ) किया है | हाल ही में उनकी एक नई किताब आई है , जो उनके सबसे लोकप्रिय किरदारों की कहानी कहती है | एक छोटा लड़का, एक घोड़ा ( जो पहले उड़ सकता था !) , एक छछूंदर और एक लोमड़ी – ये सब संयोग से मिलते हैं और साथ में रोमांचक यात्राएं करते हैं | इस तरह  शुरू होती है दोस्ती और मानवीय रिश्तों के गर्माइश की एक कहानी जो अकेलेपन , सफलता , प्रेम , हौसले  और उन सब चीज़ों की बात करती है जिनके बारे में इन चारों दोस्तों  को सीखना ज़रूरी होता है | इनके साथ सफ़र करते -करते , चार्ली बहुत प्यार से हमारा हाथ  पकड़कर हमको भी  इन सीखों में शामिल कर लेते हैं |

सुंदर ,पनीले से बहते यह कार्टून कब किताब से बाहर निकलकर आपके साथ चलने लगेंगे , आपको पता भी नहीं लगेगा ..

 

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“ख़ुद के प्रति दयालु होना , संसार की सबसे बड़ी दयालुता है .”- छछूंदर ने कहा |

 

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

” तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो ?”

“दयालु ” – लड़के ने कहा |

मनोविज्ञान का मानना है कि हम सबके अन्दर एक बच्चा रहता है जिसे ज़रूरत होती है प्यार  और आश्वासन की |वह  दुनिया को उन्ही नज़रों से देखता है जैसे हम अपने बचपन में देखते थे | और वो बच्चा ज़्यादातर डरा रहता है, यह स्वीकार करना हमारे लिए बहुत  मुश्किल होता है  |नज़रंदाज़ किया गया  यही डर हमारे जीवन के हर हिस्से में रिस आता है और  हमें हर उस चीज़ से दूर करता जाता है जो हमें प्यारी होती है …

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“ज़्यादातर छछूंदरों जिनको मैं जानता हूँ , आज अफ़सोस करते हैं कि काश उन्होंने अपने डर से ज्यादा अपने सपनों की सुनी होती |”

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“सोचो ! हम कैसे होते अगर हम थोड़ा कम डरते?”

चार्ली का मानना है कि इन डरावनी ,अँधेरी राहों से लड़ने का एक ही तरीका है – हमारे दोस्त और उनका प्यार| 

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

” कभी- कभी मुझे लगता है मैं  खो गया हूँ “- लड़के ने कहा |

” मुझे भी ,” छछूंदर ने कहा ,”पर हम तुमसे प्यार करते हैं , और प्यार तुम्हे वापस घर ले आता है.”

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“हम सब थोड़ा डरे हुए हैं ” – घोड़े ने कहा |

” पर साथ में , हमारा डर कम हो जाता है “

दोस्तो के साथ चलते हुए , हम अक्सर कमज़ोर पड़ते हैं | तब हमें ज़रूरत होती है इन्ही दोस्तो की मदद की ,पर यह काम इतना आसान नहीं होता | अपने गर्व को मार-कर , मसलकर यह स्वीकार करना कितना मुश्किल होता है कि हम अब आगे नहीं चल सकते ? यह काम हम वयस्कों को , बच्चों की तुलना में ज्यादा मुश्किल लगता है | ऐसे ही कारणों से, ज़िन्दगी के तरीकों में बच्चे , हमसे बेहतर साबित होते हैं.. 

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“तुमने आज तक सबसे ज़्यादा बहादुरी वाली बात क्या कही है ?”, लड़के ने पूछा |

“मुझे मदद चाहिए ” , घोड़ा बोला |

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“मदद मांगने का यह मतलब नहीं हार मानना नहीं होता है ” घोड़ा बोला |

“इसका मतलब  हार मानने से इनकार करना होता है “

और बिलकुल इतने ही सीधे -सादे तरीके से, शायद मेरी ज़िन्दगी की सबसे खूबसूरत बात ,चार्ली ने कह दी |

इस किताब की यही सबसे सुंदर बात है , यह बच्चों के लहजे में बहुत अर्थवान बात कह जाती है | दोस्तो को इसने जिंदगी में बहुत अहम् जगह दी है , पर ख़ुद से ऊपर नहीं | खलील जिब्रान ने कहा था – मुझे तब अपनी आत्मा से घृणा हुई जब मैंने उसे एक लंगड़े के सामने लंगड़ाते देखा |चार्ली की संवेदनशील कलम नीचे के चित्र में उस दर्द को जज़्ब कर लेती है , जो हम महसूस करते हैं , हर बार जब हम ख़ुद को कमतर कर लेते हैं कि हमारे दोस्त हमारे साथ ज़्यादा सहज महसूस करें | जब हम ऐसे लोगों से घिरे होते हैं जो सफलता का जश्न मनाने के बजाय उससे द्वेष करना ज़्यादा पसंद करते हैं ..

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“मैंने तुमसे एक बात छुपाई है ” , घोड़ा बोला 

“वो क्या है ?” लड़के ने कहा 

“मैं उड़ सकता हूँ . पर मैंने उड़ना छोड़ दिया क्योंकि इससे दूसरे घोड़े जलते थे |”

इन रेखाओं में चार्ली ने खूब सारी मोहब्बत के साथ खूब सारी सच्चाई भी भरी है | शायद इसी कारण ये ज़िन्दा होकर  अपने अर्थ के साथ पन्नों में तरलता से बहती हैं..

पर शायद जो सबसे ज़रूरी चीज़ इस किताब के पन्नों में छिपी है वो है एक टूटे दिल की मरम्मत की तरकीब | 

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

“हम क्या करते हैं जब हमारे दिलों में दर्द होता है ?” ,लड़के ने पूछा |

” हम उन्हें दोस्ती , साझा आंसुओं और वक़्त में लपेट लेते हैं , जब तक वो फ़िर से उम्मीद और ख़ुशी से नहीं भर जाते “

ख़ुद को बचाने के इतने पुख्ता इन्तेजाम मुहैया करने कि वजह से ही मुझे यह किताब दुनिया बचाने की मुहिम शुरू करती दिखाई देती है | एक दिल का ख़ुशी और उम्मीद से भरना, पूरी दुनिया के एक  छोटे से हिस्से में उम्मीद और ख़ुशी का भर जाना है | पूरी दुनिया की  नाउम्मीदी का थोड़ा कम हो जाना है |

अगली बार जब आप खुद को ( और दुनिया को )  बचाते -बचाते थोड़ा थक जाएँ और कोई चीज़ ख़त्म होते महसूस करें  तो मेरी ही तरह , चार्ली के कहने पर, पीछे  मुड़कर देखिएगा ..

‘द बॉय , द मोल , द फ़ॉक्स एंड द हॉर्स ‘ से साभार

अंत 

देखो ! हम कितना आगे आ चुके हैं ..

चार्ली की इस करिश्माई दुनिया का हिस्सा बनने के लिए आप उनको इन्स्टाग्राम पर फ़ॉलो कर सकते हैं |

चार्ली मैकेसी इन्स्टाग्राम 

(किताब के अंश का अंग्रेजी से अनुवाद – शुभांगी मिश्र )

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